Veer Khudiram Bose leads Indian Freedom Fight in Bengal
वह अक्सर अपने मित्रों के साथ देश को आजाद कराने की बातें किया करते थे। उसी दौरान भारत के तत्कालीन गर्वनर लॉर्ड कर्जन ने बंगाल के विभाजन का प्रस्ताव रखा जिसके आधार पर बंगाल को दो टुकड़ों में बांट दिया गया। इसके बाद पूरे देश में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई। इसके चलते देश भर में विद्रोह की लपटें उठने लगी.
इसी दौरान मुजफ्फरपुर में भारतीयों को कोलकाता के मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड द्वारा कड़ी सजा दी जा रही थी। इससे नाराज खुदीराम बोस ने किंग्सफोर्ड को मारने का निश्चय कि या परन्तु ऎन मौके पर किंग्सफोर्ड के नहीं आने के कारण वह बच गया और दो यूरोपियन महिलाओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। भारत के इतिहास में यह पहला बम विस्फोट था जिसकी आवाज तीन मील तक सुनाई दी.
जल्दी ही बम फेंकने के आरोप में खुदीराम बोस को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। उन्हें जज द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। शहीद खुदीराम बोस को आज ही के दिन 11 अगस्त 1908 को मात्र 18 वर्ष की उम्र में फांसी दे दी गई। परन्तु बोस की इस शहादत ने बंगाल में हजारों लाखों युवाओं को देश के लिए मर मिटने की राह दिखा दी जिसके बाद पूरे बंगाल में युवा देशभक्तों ने ब्रिटिश राज्य को हिला दिया.

0 Comments